गलत फहमियों के सिलसिले इतने दिलचस्प है ,
हर ईंट सोचती है कि दीवार बस मुझसे जिन्दा है..!
इस तरह खामोश रह कर बिताई है जिंदगी मैंने,
मेरी धडकनों को भी पता नही, दिल रो रहा है।।
हर ईंट सोचती है कि दीवार बस मुझसे जिन्दा है..!
इस तरह खामोश रह कर बिताई है जिंदगी मैंने,
मेरी धडकनों को भी पता नही, दिल रो रहा है।।
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